Monday, December 5, 2022
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दुनिया के मुसलमानों से सहरा करीमी की यह खुला ख़त, मुँह मत मोड़ो, मेरे खूबसूरत देश को बचाओ

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Sahraa Karimi: अफगानिस्तान में हालात पूरी तरह से हाथ से निकल चुके हैं. तालिबान (Taliban) ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है. हज़ारों-लाखों लोग अपने भविष्य को लेकर चिंता में हैं. पूरे अफगानिस्तान में अफरातफरी का माहौल है. करीब-करीब सभी अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से वापस लौट चुके हैं. हजारों लाखों लोग भी अफगानिस्तान से वापस लौटना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है.
अफगानिस्तान में कुछ ही दिन में सामने आए इस मानवीय संकट के बीच अफगानिस्तान की बड़ी हस्तियाँ दुनिया से मदद की अपील कर रही हैं. अफगानिस्तान की फिल्म डायरेक्टर सहरा करीमी ने दुनिया के नाम जिस तरह से खुला ख़त लिखा है, वो दिमाग को झकझोर देने वाला है.
अफगानिस्तान की मशहूर फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर सहरा करीमी ने एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें अफगानिस्तान पर तालिबान द्वारा तेजी से कब्जा किए जाने के प्रभाव के प्रति दुनिया को जगाने की अपील की है. करीमी का पत्र अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संगठनों को भेजा गया है. करीमी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर भी इसे पोस्ट किया है. करीमी कहती हैं- नमस्कार, तालिबान शहर में पहुंच गया है. हम बचते फिर रहे हैं. इसमें वह दौड़ती हुई दिखाई देती है और दूसरों से बचने का आग्रह करती है.
करीमी ने कहा- तालिबान महिलाओं के अधिकारों को छीन लेगा. हमारी आवाज को दबाकर हमें घरों दबकर रहने पर मजबूर किया जाएगा और हमारी अभिव्यक्ति को खामोश कर दिया जाएगा. जब तालिबान सत्ता में थे, तब शून्य लड़कियां स्कूल में थीं. 2001 के बाद से अब तक स्कूलों में 90 लाख से अधिक अफगान लड़कियों ने दाखिला लिया. इन कुछ हफ्तों में तालिबान ने कई स्कूलों को नष्ट कर दिया है और 20 लाख लड़कियों को अब फिर से स्कूल से बाहर करने के लिए मजबूर किया गया.”
उन्होंने कहा, “मेरे देश में एक फिल्म प्रोड्यूसर के रूप में मैंने जो कुछ भी बनाने के लिए इतनी मेहनत की है, उसके गिरने का खतरा है. अगर तालिबान ने कब्जा कर लिया तो वे सभी कलाओं पर प्रतिबंध लगा देंगे. मैं और अन्य फिल्म प्रोड्यूसर उनकी हिट सूची में अगले स्थान पर हो सकते हैं.”
दुनिया के मुसलमानों से सहरा करीमी की यह खुला ख़त, मुँह मत मोड़ो, मेरे खूबसूरत देश को बचाओ
करीमी ने कहा- पिछले कुछ हफ्तों में तालिबान ने हमारे लोगों का नरसंहार किया है. तालिबान ने कई बच्चों का अपहरण किया है. तालिबान ने लड़कियों को बाल वधू के रूप में अपने पुरुषों को बेच दिया है. तालिबान ने एक महिला की हत्या महज उसके कपड़ों की वजह से कर दी है. उन्होंने एक महिला की आंखें फोड़ दी हैं. तालिबान ने यातना दी और एक की हत्या कर दी. एक मेरे प्रिय कॉमेडियन को मार दिया. हमारे इतिहासकार कवियों में से एक की हत्या कर दी. अफगानिस्तान की सरकार के संस्कृति और मीडिया के प्रमुख की हत्या कर दी है.”
सहरा करीमी ने कहा कि हमें दुनिया के लोगों की आवाज़ चाहिए है. मीडिया, दुनिया की सरकारें और दुनिया भर की मानवीय संस्थाएं चुप हैं. मैं ये चुप्पी नहीं समझ पा रही हूं. तालिबान के साथ अमेरिका का शांति सौदा कभी भी वैध नहीं था. इस समझौते ने तालिबान को सत्ता में लौटने की ताकत दी. जब से ही समझौते की प्रक्रिया शुरू हुई, तब से ही तालिबान हमारे लोगों पर अत्याचार करता आ रहा है
.सहरा ने कहा कि मैंने एक फिल्मकार के रूप में अपने देश अफगानिस्तान के लिए खूब मेहनत की. अब उसके ख़त्म होने का खतरा है. तालिबान कला पर प्रतिबंध लगा देंगे. वह महिलाओं के अधिकारों को ख़त्म कर देंगे. घरों में धकेल देंगे.
सहरा करीमी ने कहा कि मैं अफगानिस्तान में ही रहूंगी. अपने देश के लिए लड़ूंगी, लेकिन मैं इतना अकेले नहीं कर सकती. मुझे सहयोग की जरूरत है. हमारे साथ, हमारे अफगानिस्तान के साथ क्या हो रहा है, यह दुनिया को समझाने में मदद करें. मैं कहना चाहती हूं कि अपने-अपने देश के महत्वपूर्ण मीडिया तक सूचना पहुंचाएं कि आखिर अफगानिस्तान में क्या हो रहा है. अफगानिस्तान के बाहर हमारी आवाज़ बनें. तालिबान के चलते हमें इंटरनेट या सूचना को आगे बढ़ाने के उपकरणों तक भी हमारी पहुँच नहीं रह पाएगी.
सहरा ने पत्र में लिखा कि अफगानिस्तान में कोई गृह युद्ध नहीं है. ये एक छद्म युद्ध है. ये युद्ध तालिबान से अमरीका के समझौते का नतीजा है. सहरा ने अपील की कि लोग हमारी मुश्किलों के बारे में मीडिया से साझा करें, सोशल मीडिया पर लिखें. दुनिया ऐसे मुंह नहीं मोड़ सकती. हमें समर्थन चाहिए. ऐसे वक़्त में ये समर्थन ही हमारे लिए बहुत बड़ी मदद होगी. हमारे पास बहुत कम समय है. आपका बहुत-बहुत शुक्रिया. मैं आपकी सहृदयता की दिल से सराहना करती हूं.
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